Header Ads Widget

Responsive Advertisement

आज रात दिखेगा उपछाया चंद्र ग्रहण:पेनुमब्रल ग्रहण की नहीं होती है धार्मिक मान्यता, जानिए पूरे दिन कौन-कौन से धर्म-कर्म किए जा सकते हैं

आज (शुक्रवार, 5 मई) की रात पेनुमब्रल यानी उपछाया चंद्र ग्रहण हो रहा है। इस ग्रहण की धार्मिक मान्यता नहीं होती है, इस कारण इसका सूतक भी नहीं है। आज वैशाख पूर्णिमा, बुद्ध जयंती है। पूर्णिमा से जुड़े धर्म-कर्म पूरे दिन किए जा सकेंगे।

www.timeanddate.com वेबसाइट के मुताबिक, पेनुमब्रल चंद्र ग्रहण आज शाम 8.44 बजे से शुरू हो जाएगा और रात में 1.01 खत्म होगा। इस तरह ये ग्रहण 4 घंटे और 18 मिनट का रहेगा।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा कहते हैं कि शास्त्रों में ऐसे चंद्र ग्रहण को मांद्य, उपछाया कहा जाता है। इस ग्रहण में चंद्रमा के सामने धूल जैसी परत दिखाई देती है। चंद्र पर पृथ्वी की सीधी छाया नहीं पड़ती है, इसलिए इसका कोई धार्मिक महत्व भी नहीं है।

धार्मिक मान्यता - पुराने समय में देवताओं ने दानवों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था। मंथन के अंत में अमृत निकला। देवताओं को अमृत देने के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी अवतार लिया। मोहिनी देवताओं को पिला रही थी, उस समय राहु नाम का एक असुर भी देवताओं का वेश बनाकर वहां पहुंच गया। मोहिनी ने राहु को देवता समझकर उसे भी अमृत पिला दिया।

सूर्य और चंद्र देवताओं के बीच बैठे राहु को पहचान गए थे। उन्होंने ये बात विष्णु जी को बता दी। विष्णु जी ने तुरंत ही सुदर्शन चक्र से राहु का सिर धड़ से अलग कर दिया। राहु अमृत पी चुका था, इस कारण उसे मृत्यु नहीं हुई, लेकिन उसके दो हिस्से हो गए। सिर को राहु और धड़ को केतु के नाम से जाना जाता है। सूर्य और चंद्र ने उसका राज विष्णु जी को बताया था, इसकारण वह इन दोनों को शत्रु मानता है। राहु शत्रुता के कारण सूर्य और चंद्र को समय-समय पर ग्रसता है यानी निगल लेता है। इसे ही ग्रहण कहा जाता है।

विज्ञान के मुताबिक, जब जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्र एक सीधी लाइन में आ जाते हैं और चंद्र पर पृथ्वी की छाया पड़ने लगती है तो चंद्र ग्रहण होता है। जब सूर्य, चंद्र और पृथ्वी एक सीधी लाइन आ जाते हैं और चंद्र की छाया पृथ्वी पर पड़ती है तो इस स्थिति को सूर्य ग्रहण कहते हैं।

वैशाख पूर्णिमा पर राशि अनुसार कौन-कौन से शुभ काम किए जा सकते हैं

मेष- घर के आसपास जरूरतमंद लोगों को दूध या खीर बांटें।

वृष- दही और गाय का घी छोटे बच्चों को दान करें।

मिथुन- घर के आसपास किसी मंदिर में छायादार वृक्ष का पौधा लगाएं।

कर्क- जल का दान करें। किसी प्याऊ में पानी से भरा मटका दान कर सकते हैं।

सिंह- गुड़ का दान करें।

कन्या- घर के आसपास छोटी कन्याओं को पढ़ाई से जुड़ी चीजें जैसे कॉपी, पेन आदि दान करें।

तुला- दूध, चावल और शुद्ध घी का दान करें।

वृश्चिक- लाल मसूर की दाल का दान करें।

धनु- चने की दाल पीले कपड़े में बांधकर दान करें।

मकर और कुंभ- काले तिल, तेल, जूते-चप्पल, छाता और नीले कपड़ों का दान करें।

मीन- रोगियों को फल और दवाओं का दान करें।

वैशाख पूर्णिमा पर कर सकते हैं ये शुभ काम भी

5 मई को पर हनुमान जी के सामने दीपक जलाएं और हनुमान चालीसा का पाठ करें।

भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा करें। दक्षिणावर्ती शंख में केसर मिश्रित भरें और भगवान का अभिषेक करें। भगवान को पीले चमकीले वस्त्र अर्पित करें। ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें। तुलसी के साथ मिठाई का भोग लगाएं।

शिवलिंग के पास दीपक जलाकर ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करें। देवी पार्वती को सुहाग का सामान जैसे चूड़ी, लाल साड़ी, कुमकुम आदि चीजें अर्पित करें।

शुक्रवार (5 मई) को शुक्र ग्रह के लिए दूध का दान करें। शुक्र की पूजा शिवलिंग रूप में की जाती है। इसलिए चांदी के लोटे से शिवलिंग पर दूध चढ़ाएं।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ