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आम बजट में मप्र का हिस्सा:भोपाल, इंदौर सहित 4 शहरों में हवा साफ करने पर खर्च होंगे 150 करोड़; 20 साल पुराने करीब 3 लाख वाहन होंगे कबाड़

 

वायु प्रदूषण कम करने के लिए वित्त वर्ष 2021-22 में 150 करोड़ रु. खर्च किए जाएंगे। (प्रतिकात्मक फोटो)
  • राज्य सरकार 13 हजार करोड़ का ले सकेगी ज्यादा कर्ज
  • 10 हजार पेंशनर्स को आयकर रिटर्न भरने से मिलेगी छूट

दस लाख से ज्यादा की आबादी वाले प्रदेश के चार शहर ग्वालियर, भोपाल, इंदौर और जबलपुर में वायु प्रदूषण कम करने के लिए वित्त वर्ष 2021-22 में 150 करोड़ रु. खर्च किए जाएंगे। यह राशि उस 2217 करोड़ रु. का ही हिस्सा है, जिसे आम बजट में 42 शहरों के लिए रखा गया है। इससे शहरों में धूल और धुएं को नियंत्रित किया जाएगा।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय निदेशक पी. जगन ने बताया कि मप्र में छह शहर नॉन अटेनमेंट सिटी घोषित किए गए थे। यहां वायु प्रदूषण रोकने के लिए एक्शन प्लान तैयार कर केंद्र सरकार को भेजे थे। बड़ी आबादी वाले चार महानगरों को प्रायोरिटी के आधार पर फंड मिलेगा। छह विभागो को नगरीय प्रशासन, परिवहन, कृषि, उद्योग, पर्यावरण और ऊर्जा विभाग को यह राशि अलग-अलग मिलेगी।

भोपाल मंडल के इटारसी से होकर गुजरेगा डेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर : बजट में इटारसी और विजयवाड़ा के बीच डेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर (उत्तर-दक्षिण गलियारा) की घोषणा की है। इसके बनने से मध्य प्रदेश समेत आसपास के राज्यों के किसान, व्यापारी, उद्योगपतियों समेत अन्य व्यवसायियों को फायदा होगा। रेलवे ने इस कॉरिडोर को जून 2022 तक चालू करने का लक्ष्य रखा है।{जनजातीय क्षेत्रों में 750 एकलव्य मॉडल आवासीय स्कूल स्थापित करने का लक्ष्‍य तय किया है। एक स्कूल की लागत 38 करोड़ का प्रावधान है। मप्र के करीब 25 जिलों के 89 विकासखंड जनजातीय क्षेत्रों में आते हैं। इन्हें इसका लाभ मिलेगा।

स्क्रैप पॉलिसी का असर: 35 हजार वाहन सड़कों से हटेंगे

बजट में सरकार ने 20 साल पुराने वाहनों के लिए स्क्रैप नीति घोषित की है यानी इतने पुराने जितने भी वाहन हैं, उन्हें सड़कों से हटाया जाएगा। ग्वालियर, भोपाल, इंदौर और जबलपुर में करीब 3 लाख वाहन (यात्री व कमर्शियल) ऐसे हैं, जो 20 साल तक पुराने हैं। इनमें 35 हजार ग्वालियर में हैं। ट्रांसपोर्ट कमिश्नर मुकेश जैन का कहना है कि 15 साल पुराने कमर्शियल वाहनों की जानकारी निकलवा रहे हैं।

ज्यादा कर्ज का फायदा: एक्सप्रेस-वे का निर्माण तेज होगा

राज्य सरकार फिस्कल रेस्पॉन्सिबिलिटी एंड बजट मैनेजमेंट (एफआरबीएम) एक्ट के तहत प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद का 4% तक कर्ज ले सकेगी। यानी 2021-2022 में 13 हजार करोड़ रुपए अतिरिक्त कर्ज ले सकेगी। बेहतर वित्तीय प्रबंधन पर भी .5% ज्यादा कर्ज लिया जा सकता है। इस राशि से नर्मदा और चंबल एक्सप्रेस वे निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण के काम में तेजी आ सकेगी।

रिटर्न से राहत, लेकिन कम: छूट के दायरे में सिर्फ 10 हजार

आम बजट में 75 से ज्यादा उम्र वाले आयकर दाताओं को रिटर्न दाखिल करने से छूट दी गई है। मप्र में 4 लाख पेंशनर्स हैं। इनमें से 2 लाख की उम्र 75 साल से ऊपर है। इनमें से 10 हजार को इस छूट का लाभ मिलेगा। दरअसल, बजट के प्रावधानों के अनुसार केवल पेंशन और ब्याज से आय अर्जित करने वाले ही इसके पात्र हैं। इसलिए इस छूट का लाभ लेने वालों की संख्या कम है।

किस शहर को मिलेंगे कितने

ग्वालियर- 25.5

जबलपुर- 29.5

भोपाल- 44

इंदौर- 50.5

(रुपए करोड़ में)

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