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मप्र सरकार को तीन ऐसी मशीनें मिली हैं, जिसमें दावा किया 1000 वर्गफीट तक कोरोना वायरस को कमजोर करती हैं


साइको केन नाम की यह मशीन सीएस ऑफिस में लगी है।



  • आईसीएमआर निरेह भोपाल के डायरेक्टर ने कहा- इस पर भरोसा करना ठीक नहीं



मप्र सरकार को तीन ऐसी मशीनें मिली हैं, जिसमें दावा किया है कि वह एक हजार वर्गफीट के बंद कमरे में हवा अथवा जमीन पर मौजूद कोरोना वायरस को 99.9 फीसदी तक कमजोर कर देते हैं। ये मशीनें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस और अपर मुख्य सचिव मोहम्मद सुलेमान के पास हैं। मुख्य सचिव ने तो इसे अपने ऑफिस में लगवाया है। हालांकि आईसीएमआर निरेह भोपाल ने कहा है कि ऐसी मशीनों पर भरोसा करना ठीक नहीं।


निर्माता कंपनी ने साइको केन नाम की यह मशीनें मप्र सरकार को बतौर कांप्लेमेंटरी दी हैं। कंपनी का दावा है कि यह मशीन प्रति सैकेंड 10 से 100 लाख करोड़ इलेक्ट्रॉन छोड़ती है। इसे हाइपरचार्ज हाई वेलोसिटी इलेक्ट्रॉन कहते हैं। बंद स्पेस में यदि कोरोना वायरस है तो वह इससे कमजोर पड़ जाता है।


बहरहाल, पीडब्ल्यूडी विभाग ने हाल ही में समीक्षा बैठक में इसकी जानकारी पीडब्ल्यूडी मंत्री गोपाल भार्गव को दी। चूंकि अभी इस मशीन को केंद्र सरकार से अधिकारिक मंजूरी नहीं मिली, इसलिए इसे खरीदने की कार्यवाही नहीं हो रही।


सेनिटाइजेशन चेंबर के बारे में भी ऐसे ही दावे किए थे, बाद में बैन करना पड़ा था
आईसीएमआर निरेह भोपाल के निदेशक डॉ. आरएन तिवारी का कहना है कि वायरस को खत्म करने या कमजोर करने वाली टेक्नोलॉजी के तमाम क्लेम शुरूआत से ही सामने आ रहे हैं, लेकिन टेस्ट और ट्रॉयल के बिना इन पर भरोसा करना ठीक नहीं हैं। सेनिटाइजेशन चेंबर के बारे में भी ऐसे ही दावे किए गए थे, लेकिन बाद में उन्हें बैन करना पड़ा था। अभी तक की मेरी जानकारी के अनुसार इलेक्ट्रोन बीम से कोरोना को कंट्रोल करने वाली तकनीक को सरकार की ओर से कोई एप्रूवल नहीं दिया गया है।


 


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