Header Ads Widget

Responsive Advertisement

वैज्ञानिकों ने महासागरीय कचरे के जरिए पिछले 6.6 करोड़ साल में जलवायु में हुए बदलाव के बारे में जानकारी हासिल की.

इतने सालों की चार अलग अवस्थाएं
वैज्ञानिकों की इस टीम ने चार अलग तरह की अवस्थाएं पाई हैं, हॉटहाउसेस हैमहाउसेस, कूलहाउसेस और आइस हाउसेस. शोधकर्ताओं के मुताबिक इन अवस्थाओं पर पृथ्वी की धुरी (Axis of earth) और पृथ्वी के सूर्य का चक्कर लगाने वाली कक्षा का खास प्रभाव है.
इन दो कारकों का प्रभाव
इस अध्ययन के नतीजे साइंस जर्नल में प्रकाशित हुए हैं जिसमें टीम सेनोग्रिड ने एक जलवायु संदर्भ वक्र (Climate reference curve) बनाया है जो जलवायु का पिछले रिकॉर्ड बताता है. इसके साथ ही इससे यह भी पता चलता है कि डायनासोर के विलुप्त होने के बाद पृथ्वी की जलवायु में किस तरह के परिवर्तन आए.


क्या अध्ययन करने का प्रयास था
इस अध्ययन की सहलेखिका और लंदन में UCL अर्थ साइंस की डॉ एना जॉय ड्रयूरी ने बताया, “हमने यह समझने का प्रयास किया कि पृथ्वी के सामान्य जलवायु परिवर्तन विविधताएं क्या है और पृथ्वी पिछली घटनाओं से कितनी जल्दी उबर सकी. जब हम बताते हैं कि पृथ्वी ने इससे ज्यादा गर्म जलवायु को झेला है तो ये जलवायु परिवर्तन के संकेत रहे थे जो कि हमारे आज  संसार से बहुत अलग थे.”


इन नमूनों का विश्लेषण
अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं की एक टीम ने समुद्र तल से पिछले पांच दशकों से जमा किए गए नमूनों का विश्लेषण किया. उन्होंने एक गणितीय विश्लेषण के जरिए ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जनों में बदलाव से संबंधित चार जलवायु हालातों की पहचान की.

इस काल में हुई थी ग्लोबल वार्मिंग
शोधकर्ताओं ने बताया कि 5.5 करोड़ साल पहले  पैलेयोसीन-एयोसीन थर्मल मैक्जिमम (PETM)  काल में तेजी से ग्लोबल वार्मिंग हुई थी. उससमय बहुत ज्यादा मात्रा में कार्बन वायुमंडल में आ गया था जिससे पृथ्वी की जलवायु बहुत गर्म हो गई थी. वहीं एयोसीन काल में यानि कि 3.4 करोड़ साल पहले अंटार्कटिका में बर्फ की चादर बनना शुरू हो गई थी क्यों की कार्बन डाइ ऑक्साइड का स्तर गिरने लगा था जिसे जलवायु की अवस्था कूलहाउस स्थिति में आ गई थी.


अब ये बेहतर जानकारी है
शोधकर्ताओं ने बताया कि अब वे सटीक तौर पर जानते है कि पृथ्वी कब बहुत गर्म थी और कब बहुत ठंडी. इसके अलवा वे इसमें अंतर्निहित  गतिविज्ञान और संबंधित प्रक्रियाओं को भी बेहतर समझ सके हैं.

सबसे दिलचस्प बात
इनमें सबसे दिलचस्प तथ्य यह सामने आया है कि 6.6 करोड़ साल पहले से 3.4 करोड़ साल पहले तक पृथ्वी आज के मुकाबले काफी गर्म थी क्योंकि यह उस समय के समकक्ष है जब मानवीय गतिविधि के कारण ऐसे बदलाव आ सकते हैं. शोधकर्ताओं के मुताबिक पिछले 30 लाख साल पहले से पृथ्वी की जलवायु आइस हाउस रही है जिसमें गर्म और ठंडे मौसम रहे हैं.
शोधकर्ताओं के मुताबिक आज की स्थितियों में मानवीय गितिविधियों के कारण उत्सर्जित ग्रीन हाउस गैसों से पृथ्वी की जलवायु हॉटरहाउस की ओर बढ़ रही है.ऐसा एओसीन काल से नहीं देखा गया है. डॉ ड्रयूरी का कहना है कि हॉटहाउस की गर्म जलवायु के समय से पृथ्वी की जलवायु पिछले 5 करोड़ साल से लगातार ठंडी होती रही है, लेकिन आज के हालात में जल्दी हो रहे बदलाव इस ट्रेंड को पलट रहे हैं. ये विविधताएं पिछले 6.6 करोड़ सालों मे सबसे अधिक हैं.


एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ