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भोपाल. बाबरी विध्वंस केस में 28 साल बाद आखिरकार फैसले की घड़ी MP की पूर्व सीएम उमा भारती का क्या होगा?


एमपी की पूर्व सीएम उमा भारती. फाइल फोटो.

भोपाल. बाबरी विध्वंस केस में 28 साल बाद आखिरकार फैसले की घड़ी निकट आ गई है. उत्तर प्रदेश के लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत 30 सितंबर को इस केस में अपना फैसला सुनाएगी. इसको देखते हुए मध्य प्रदेश के दो बड़े नेताओं पर सबकी निगाहें टिक गई हैं. इनमें से एक हैं पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती और दूसरे हैं बजरंग दल के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया. ये दोनों भी बाबरी केस में आरोपी बनाए गए थे. लिहाजा 30 सितंबर को आने वाले फैसले में इनके भविष्य का भी फैसला होगा.


फैसले को देखते हुए पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया ग्वालियर से लखनऊ के लिए रवाना हो गए हैं, जबकि कोरोना पॉजिटिव होने की वजह से ये माना जा रहा है कि उमा भारती वीसी के ज़रिए कोर्ट की कार्यवाही में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगी.

12 जून को हुए थे अंतिम बयान
इससे पहले 12 जून को बजरंग दल के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और मध्य प्रदेश बीजेपी के कद्दावर नेता जयभान सिंह पवैया के अंतिम बयान दर्ज किए गए थे. ग्वालियर से लखनऊ पहुंचे जयभान सिंह पवैया ने सीबीआई कोर्ट में अपने बयान दर्ज कराए थे. 5 घंटे तक चली कार्यवाही के दौरान उनसे कुल 1050 सवाल किए गए थे. इनमें कुछ सवाल प्रश्नावली के तहत पूछे गए. जबकि कुछ सवाल जज की ओर से पूछे गए थे. जयभान सिंह पवैया ने इन सभी 1050 सवालों के जवाब दिए थे. सीबीआई की विशेष कोर्ट में बयान दर्ज कराने के बाद जयभान सिंह पवैया ने अपने बयान में कहा था कि अगर राम काज के लिए उन्हें कोई कुर्बानी देनी पड़ी तो वह इसके लिए तैयार हैं.
क्या है मामला?


6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में विवादित बाबरी मस्जिद का ढांचा गिरा दिया गया था. इस मामले में बीजेपी के कई दिग्गज नेताओं को आरोपी बनाया गया था, जिसमें लाल कृष्ण आडवाणी, उमा भारती, मुरली मनोहर जोशी, कल्‍याण सिंह, जयभान सिंह पवैया समेत कई और बड़े नेता शामिल थे. इन सभी ने अदालती कार्रवाई का सामना किया. कई साल से चल रहे इस केस में कुछ आरोपियों की मृत्यु भी हो चुकी है.

एमपी से उमा-जयभान दो बड़े नाम
विवादित बाबरी ढांचा गिराने के मामले में करीब 32 लोग आरोपी बनाए गए थे. इनमें मध्य प्रदेश से पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती और पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया के नाम प्रमुख तौर पर शामिल हैं. केस में उमा भारती को खराब स्वास्थ्य के चलते व्यक्तिगत पेशी से छूट मिली थी. जबकि जयभान सिंह पवैया अदालत की सुनवाई के दौरान पेश होते रहे हैं. पवैया बीजेपी के उन 7 बड़े नेताओं में शामिल हैं, जिन्हें ढांचा गिरने के बाद 1993 में 13 दिन के लिए जेल भेजा गया था. इसी साल फरवरी 1993 में जयभान सिंह के ग्वालियर स्थित घर पर सीबीआई ने छापा मार कार्रवाई की थी. ये कवायद ढांचे की ईंट तलाशने के लिए की गई थी, लेकिन सीबीआई घर से उसे तलाश नहीं पाई थी.


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