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सरकार ने शनिवार को कोरोना के शिकार लोगों का आंकड़ा उनकी उम्र के अनुसार जारी किया उसमें चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं

कोरोना वायरस सबसे ज्यादा बुजुर्गों और बच्चों का शिकार नहीं करता है.


लोगों ने ये धारणा बना रखी है जो कि आंकड़ों के मुताबिक गलत साबित हो रही है



नई दिल्ली: दुनिया में कोरोना का कहर बढ़ता ही जा रहा है. कोरोना वायरस को लेकर एक आम धारणा ये है कि सबसे ज्यादा बुजुर्ग और बच्चे इस महामारी के शिकार होते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि बच्चों और बुजुर्गों में रोग प्रतिरोधी क्षमता कम होती है, लेकिन भारत में इस महामारी के शिकार लोगों के आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां करते हैं.

74 प्रतिशत मरीज 21 से 60 साल के बीच

सरकार ने शनिवार को कोरोना के शिकार लोगों का आंकड़ा उनकी उम्र के अनुसार जारी किया. उसमें चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं. आंकड़ों के मुताबिक जितने लोग इस महामारी के शिकार हुए हैं उनमें 0 से 20 साल की उम्र के नौ फीसदी लोग हैं जबकि 21 से 40 साल की उम्र के 33 फीसदी लोग शामिल हैं. सबसे ज्यादा यानी 41 प्रतिशत संक्रमित लोग वो हैं जो 41 और 60 साल की उम्र के बीच के हैं. मतलब ये हुआ कि देश में कोरोना के 74 फीसदी मरीज 21 से 60 साल की उम्र के बीच हैं.

केवल 17 फीसदी मरीज 60 के ऊपर

सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा 60 साल से ऊपर के मरीजों को लेकर सामने आया है. स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक भारत में कोरोना से पीड़ित केवल 17 प्रतिशत मरीज हैं जो 60 साल की उम्र से ज्यादा के हैं. ये आंकड़ा चौंकाने वाला इसलिए है क्योंकि अभी तक माना जाता है कि कोरोना से संक्रमित होने का सबसे ज्यादा खतरा बुजुर्गों और बच्चों पर होता है.

अगर 20 साल से कम और 60 साल से ज्यादा उम्र के मरीजों को मिला दिया जाए तो ये आंकड़ा महज 26 फीसदी है. सरकार के मुताबिक अब तक 75 हजार से ज्यादा कोरोना के संदिग्ध लोगों की जांच हो चुकी है. जिसमें 3015 लोग पॉजिटिव यानि संक्रमित पाए गए हैं.

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