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ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों में काम किए बिना नहीं होगा डॉक्टरी पंजीयन


 सरकारी मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस व पीजी डिग्री/डिप्लोमा करने वाले डॉक्टरों की ग्रामीण सेवा को लेकर सरकार सख्त कदम उठाने जा रही है। इन्हें बंध पत्र की शर्तों के तहत एक साल की अनिवार्य ग्रामीण सेवा करना होगी। बंध पत्र की राशि जमा कर यह डॉक्टर एक साल की सेवा से बच नहीं पाएंगे।


ग्रामीण पोस्टिंग के बाद ही मप्र मेडिकल काउंसिल या मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया से इन डॉक्टरों की स्थायी पंजीयन जारी किया जाएगा। यानी ग्रामीण सेवा के बिना यह डॉक्टर नहीं बन पाएंगे। 2020-21 के सत्र से दाखिला लेने वाले छात्रों पर यह शर्त लागू होगी


ग्रामीण क्षेत्र के अस्पताल पीएचसी, सीएचसी व सिविल अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी को देखते हुए सरकार ने अनिवार्य ग्रामीण सेवा का नियम बनाया है। इसमें सरकारी मेेडिकल कॉलेजों में स्टेट कोटे की एमबीबीएस व पीजी डिग्री/डिप्लोमा करने वाले डॉक्टरों को एक साल के इन अस्पतालों में सेवा के लिए जाना होता है।


सेवा में नहीं जाने बांड के तहत तय अनानक्षित वर्ग को 10 लाख व आरक्षित वर्ग को 5 लाख रुपए जमा करना होता है। स्वास्थ्य संचालनालय के आंकड़ों के अनुसार करीब 70 फीसदी बांडेड डॉक्टर ज्वाइन नहीं करते


अब ऐसे डॉक्टरों पर सख्ती की जाएगी। इसके लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग व मप्र मेडिकल काउंसिल मिलकर शर्तें तैयार कर रहे हैं। नए नियम लागू होने के बाद एक साल की ग्रामीण सेवा अनिवार्य हो जाएगी।


यह होगा फायदा


प्रदेश में 372 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र (पीएचसी) में डॉक्टर नहीं हैं। सामदुयाकि स्वास्थ्य केन्द्रों व सिविल अस्पतालों में विशेषज्ञों के आधे से ज्यादा पद खाली पड़े हैं। इस कारण सर्जरी नहीं हो पा रही हैं। अनिवार्य पदस्थापना से इन डॉक्टरों की कमी दूर की जा सकेेगी। विशेषज्ञों की जगह पीजी डिग्री या डिप्लोमा वाले चिकित्सकों को पदस्थ किया जा सकेगा


550 एमबीबीएस व 333 पीजी डिग्री/डिप्लोमा डॉक्टर निकलते हैं हर साल


प्रदेश में फिलहाल छह सरकारी मेडिकल कॉलेजों सेे हर साल 550 एमबीबीएस व 333 पीजी डिग्री/डिप्लोमा वाले डॉक्टर तैयार हो रहे हैं। सात नए कॉलेज शुरू होने के बाद एमबीबीएस सीटें बढ़ गई हैं। इस साल से एमबीबीएस व बीडीएस मिलाकर स्टेट कोटे 1602 हो गई हैं। साढ़े पांच साल में डिग्री पूरी होने पर इनकी ग्रामीण पदस्थापना की जाएगी। इसी तरह से पीजी की सीटें भी लगातार बढ़ रही हैं, जिससे पीजी बांडेड डॉक्टरों की संख्या बढ़ेगी


इनका कहना है


ग्रामीण सेवा अनिवार्य की जाएगी। इसके लिए नियम तैयार किए जा रहे हैं। अगले साल से यह व्यवस्था लागू करने का प्रयास है। इससे पीएचसी, सीएचसी व सिविल अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी दूर हो सकेगी


 


 


शिवशेखर शुक्ला प्रमुख सचिव, चिकित्सा शिक्षा


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