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सांवेर के एक हजार किसानों का दर्द:बोले- कोल्ड स्टोर प्रबंधन की लापरवाही से 8 करोड़ के आलू अंकुरित हुए, प्रबंधन ने कहा- मौसम का असर है; मंत्री ने दिए कार्रवाई के आदेश

 

कोरोना काल में आर्थिक मंदी से हर क्षेत्र उबरने की कोशिश में है, लेकिन इसी कड़ी में सांवेर विधानसभा क्षेत्र के एक हजार से ज्यादा किसानों को बड़ा नुकसान हो गया। उनके कोल्ड स्टोरेज में रखे 8 करोड़ रु. कीमत के 55 हजार क्विंटल आलू खराब हो गए। किसानों का आरोप है कि कोल्ड स्टोरेज प्रबंधन की लापरवाही से आलू खराब हुए हैं, जबकि कोल्ड स्टोरेज मैनेजर का कहना है कि मौसम के प्रभाव से आलू खराब हुए हैं। इसके जिम्मेदार किसान ही हैं। इसे लेकर किसान शिप्रा़ पुल पर अनिश्चितकालीन महापंचायत की तैयारी में हैं। मामले में तुलसी सिलावट ने कहा कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी। यह सरकार किसानों की है। मैं हर समय किसानों के साथ हूं। हर संभव उनका साथ दिया जाएगा।

मामला विधानसभा क्षेत्र के अर्जुन बडोदा, बूढ़ी बरलई, बरलगई जागीर, हनुतिया, मंडला, उदा, लसूड़िया परमार, कदवाली खुर्द, कदवाली बुजुर्ग, कदनाल बुजुर्ग, सिलोटिया, पलासिया सहित आसपास के 40 से ज्यादा गांवों के किसानों का है। किसान नेता व पूर्व जनपद सदस्य हंसराज मंडलोई व पूर्व जिला पंचायत सदस्य हुकुमचंद मालवीय बताया कि जिले के करीब 40 गांवों के 1 हजार से ज्यादा किसानों ने अर्जुन बडोदा गांव में बने झंवर कोल्ड स्टोरेज में फरवरी में 55 हजार क्विंटल आलू रखे थे। ये आलू 3 श्रणियों चिप्स, राशन और बीज के रूप में थे। इसके बाद अगस्त में जब किसान आलू लेने गए, तो कुछ दिन बाद लेने को आने का कहा गया।

दवाई छिड़कने का हवाला देकर टालमटोल

इस बीच करीब एक माह से किसानों ने कई चक्कर लगाए। बताया गया कि मौसम के प्रभाव के कारण दवाई का छिड़काव किया है, इसलिए कुछ दिनों बाद दिए जाएंगे। एक माह से ज्यादा गुजर जाने के बाद टालमटोल की गई। पता चला कि अधिकांश आलू खराब होकर अंकुरित हो गए हैं, जो किसी काम के नहीं है।

बाहर फेंकने पर बीमारी की आशंका

खास बात है कि 55 हजार क्विटंल आलू अगर बाहर फेंके जाते हैं, तो बीमारी फैलेगी। कोल्ड स्टोरज में अब काफी दुर्गंध है। उसे नष्ट करने के प्रयास नहीं किए गए हैं। किसानों का कहना है कि कोल्ड स्टोरेज प्रबंधन किसानों से एक सीजन के लिए 210 रुपए प्रति किवंटल किराया वसूलता है। आरोप है कि स्टोरेज संचालक अनिल झंवर ने बिजली बचाने के लिए 15 अगस्त को ही चिप्स के आलू वाला चेम्बर बंद कर दिया, जिससे 45 हजार क्विंटल आलू खराब हो गए। ऐसे ही जो आलू बीज के लिए रखे थे, वे सारे अंकुरित हो गए। अब ये बाजार में बेचने योग्य ही नहीं बचे हैं। इन आलुओं का बीमा भी नहीं करवाया गया था। इसमें चिप्स के आलू की अवधि 31 अगस्त तक की रहती है, जिसे एक माह ज्यादा हो चुका है।

प्रबंधन की सफाई- मिट्‌टी लगे आलू कट्‌टों में पैक कर दिए

उधर, झंवर कोल्ड स्टोरेज के मैनेजर अशोक पटेल का कहना है कि मौसमी प्रभाव से आलू खराब हुए हैं। आलू का फरवरी से जुलाई तक कोल्ड स्टोरेज में रखे जाते हैं, लेकिन कई किसान 110 दिन की बजाय 90 दिन में ही जमीन से आलू निकाल लेते हैं व आलू की साफ सफाई करने में लापरवाही बरतते हैं। वे आलू में मिट्टी लगी होने के बावजूद कट्‌टे में पैक कर देते हैं। आलू जुलाई माह में ही निकाल लेना चाहिए, लेकिन किसान बाजार में भाव बढ़ने के इंतजार में देरी करते हैं। इससे आलू खराब होने का खतरा बढ़ जाता है।

इस बार मालवा निमाड़ के कई कोल्ड स्टोरेज में आलू खराब हो गए हैं। किसानों को मुआवजे के लिए उनका भाड़ा माफ कर दिया है। खराब आलू नष्ट करने के लिए उद्यानिकी विभाग को जानकारी दे दी है। जल्द ही ट्रेचिंग ग्राउण्ड में इन्हें नष्ट किया जाएगा। बकौल पटेल आरोप निराधार है। बिजली बचत के लिए कोल्ड स्टोरेज बंद नहीं किया। मामले में बिजली कंपनी से उक्त अवधि के बिल पेश किए जा रहे हैं। किसान नेता राज मंडलोई, सुरेंद्रसिंह ठाकुर, जिला पंचायत सदस्य हुकमचंद मालवीय, संतोष चौधरी, महिपालसिंह ठाकुर आदि ने बताया कि पीड़ित किसान अब शिप्रा पुल पर अनिश्चितकालीन महापंचायत आयोजित करेंगे।

दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी, मैं हर समय किसानों के साथ हूं

जल संसाधन मंत्री व क्षेत्रीय विधायक तुलसी सिलावट ने कहा मामला गंभीर है। इसमें जांच के आदेश दिए हैं। दोषी के खिलाफ कार्रवाई होगी। मुख्यमंत्री खुद किसान के बेटे हैं व यह सरकार किसानों की है। मैं हर समय किसानों के साथ हूं। उनका ध्यान रखा जाएगा।

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